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आज का बाबा जी का सत्संग आज डेरा ब्यास में पूरे 54 मिनट सत्संग किया और बाबा जी ने अकेले सत्संग किया मतलब कि आज बाबाजी के साथ पार्टी साहब नहीं थे बाबा जी के सत्संग की शुरुआत कर्मों से की बाबाजी ने बताया कि प्रमाद की न्यू कर्मों के आधार पर रखी गई थी और हम जैसे कर्म करेंगे वैसा ही फल हमें मिलेगा और जहां तक बात किस्मत की है किस्मत भी हमारे कर्मो पर निर्भर करती है

हम जैसे कर्म करते हैं वैसे ही हमारी किस्मत बनती है मगर कर्मों का फल उस मालिक के हाथ में है बाबा जी के सत्संग फरमाया कि कर्मों के जाल से कोई नहीं बच सकता है हमें कर्मों का हिसाब किताब देना पड़ेगा अगर हम भजन बंदगी करते हैं तो इन कर्म का प्रभाव हम पर नहीं पड़ता उदाहरण के तौर पर बाबा जी ने बताया कि जैसे कि एक छोटा बच्चा है अगर हम उसको थप्पड़ मारते हैं तो उसका बहुत दर्द होती है अगर हम बड़े आदमी को वैसे ही थप्पड़ मारे तो उसको दर्द कम होगी क्योंकि मजबूत है ऐसे ही भजन बंदगी हमें मजबूत बनाती है और हम पर ग्रहों का प्रभाव नहीं पड़ता और साथ ही बाबा जी ने बताया कि कुछ लोग यह समझते हैं कि अगर हमने बुरे कर्म कर लिया है तो क्या दान पुण्य कर देंगे बाबाजी ने बताया कि बुरे कर्मों का फल मुल्क से मिलेगा अच्छे कर्मों का फल अलग से और बाबा जी ने बताया कि कर्मों में फेरबदल नहीं हो सकती.

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सब को अपने कर्मों का हिसाब किताब देना पड़ेगा इसलिए कोई भी काम करने से पहले सोचो विचारों की सही क्या है और गलत क्या है और बाबा जी ने सत्य फरमाया कि हमारी गलतियां हमें बताती हैं कि हमें करना क्या है लेकिन हम अपने गलतियों को केवल रखते हैं उन्हें समझते नहीं हमारी ग्रंथ हमारे महापुरुषों की जिंदगी का निचोड़ है और बाबा जी ने यह भी कहा कि पानी में केवल एक ही है बाकी सब तो बताया गया है कि उस हुक्म का पालन कैसे करनी है वह क्या है एक नाम है नानक नानक दिया बुझा दिया और बाकी जो भी करना है मरने के बाद आपको किसी ने एमबीए की डिग्री नहीं देनी.

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बाबा जी ने कहा कि इंसान तो अपनी जिंदगी का लक्ष्य भूल गया है उसे तो बस पैसे कमाना ही अपनी जिंदगी का लक्ष्य मालूम होता है और फिर बाबा जी ने मुस्कुरा कर कहा कुछ लोगों पता नहीं कौन सी किताबें पढ़कर आ जाते हैं कि बाबा जी ने तो इतनी रूह को प्यार करना है ताकि वह अपना मतलब की बात पढ़ लेते हैं वह साथ में लिखा हुआ नहीं पड़ती अगर भजन बंदगी करेंगे तो साथ लेकर जाएंगे और फिर बाबा जी ने कहा कि हम भजन बंदगी को निभा सकते लेकिन अपने बर्तन को साफ रखने की कोशिश तो कर सकते हैं बड़े करने की जिम्मेदारी उसकी है.

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और अंत में बाबा जी ने फरमाया कि आपको जो भी मिलेगा आपकी करने का ही मिलेगा और अपने अंदर ही मिलेगा भाई सत्संग सुनने से कम नहीं खत्म हो सकते सेवा करने से कर्म नहीं खत्म हो सकते कर्म तो केवल नाम की कमाई और शब्द की कमाई से ही खत्म हो सकती हैRadha Soami Ji