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बड़े हजूर बाबा सावन सिंह जी की साखियों
से एक विशेष प्रसंग है ।
जो झेलम की साखी का है
नाम दान देने से पहले जीवो को कुछ
हिदायते दिया करते थे ।
मॉस, शराब , पर स्त्री ,पर पुरुष , झूठ ,
चोरी ,निंदा छोड़ने के साथ ही नॉम की कमाई
करने की हिदायत देते थे।
झेलम में जीवो को नाम दान देते समय छांटी
चल रही थी ।
जिन्हें निकालना होता उन्हें 6 माह तक सत्संग
सुनने और संगत की सेवा करने की हिदायत देते।
जब नाम दान देना शुरू करने लगे तो एक पठान
जो लंडीकोटल का था हजूर जी के सामने पहुच
कर बड़े पियार से माथा टेका और विनती की ,
दाता जी मेरी पुकार सुन लीजिये , उस पठान
कहा –दाता जी में सच बोलता हूँ , सतगुर दाता जी
बहुत खुश हुए कहा “भाई सच बोलना ही ठीक है ।”
पठान ने कहा “दाता जी मेरी स्त्री बहुत बदमाश
थी , मेरा ख्याल कुछ बन्दगी में था , मुझे हराम खोरी
का पैसा खिलाती थी ।
मैंने उसको बहुत प्रेम से समझाया कि तू
पॉप न कर मेरी बन्दगी में भी विघन पड़ता है तुम्हारे
पॉप से।
लेकिन वह न मानी । मेने अपनी स्त्री को मार डाला
और अदालत में जा कर सच्चा हाल ब्यान कर
दिया । उसका दोस्त था मरे पर मुकदमा कर दिया
छः महीने चला आखिर में मुझे फांसी का हुकम हुआ
। में नजर बंद था जेल में । मेने सोचा , हे खुदा
तेरे गुनाहो से डर कर तो मेने यह काम किया
और तुमने मेरी मदद न की , यदि इस समय खुदा
का कोई का रूप है तो मेरी मदद

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करो
नहीं तो में समझूँगा खुदा नहीं है , इस तरह सारी
रात खुदा को याद करता रहा ,याद करते करते
मेरी आँख लग गयी , आँख लग गयी तो ख़याल
आया की जनाब आप मेरे सामने खड़े खड़े
जलाल में कहने लगे “देख भाई खुदा तेरे साथ है
कंही जुदा नहीं तू फिकर न कर खुदा तेरी मदद
करेगा ।
जेल के ताले खुले है सिपाही सब सो रहे तू निकल
जा “।मैंने उठ कर देखा तो सब ताले खुले पड़े थे
आपने मेरे से कहा तू जेल से निकल जा , में तुम्हे
झेलम में मिलूंगा ।
में उसी समय बाहर आ गया मुझे किसी ने नहीं
देखा ।
में आपको एक साल तक झेलम में ढूढ़ता रहा ,
एक साल हो गया है में यंहा सब्जी बेच
कर गुजारा करता हु , बन्दगी हक़ की कमाई खा कर
गुजारा करता हु — में सुखी हूं आप जनाब की मोटर
जा रही थी , में जनाब को मोटर में देख कर पहचान
गया की ये वो ही खुदा जिसने मुझे ताले तोड कर
जेल से बाहर निकाला था ।
कहा था झेलम में आ जा तुझे कलमा देंगे ।
दाता जी मुझे कलमा दीजिये , सतगुर ने कहा–” भाई
तुझे जरूर कलमा देंगे तू सचा आदमी है ।
दाता जी दया कर उसको कलमा दिया ।
सभी प्यारे सतसंगी भाई बहनों और दोस्तों को हाथ जोड़ कर प्यार भरी राधा सवामी जी..

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