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सतगुरु जब चाहे तारे🌺
बाबाजी एक बार अपने किसी सेवक के साथ कार में कहीं जा रहे थे रास्ते में एक आम की गाड़ी दिखाई दी.
बाबाजी ने गाड़ी रुकवाई.
आम वाले से कहा कि ऊपर के दो, और साईड के तीन हटाकर अंदर के आम निकाल कर तोलकर दे दो.
यह देखकर सेवादार के मन मे सवाल आया कि बाबाजी ने यहॉ से आम लिये और अंदर से निकलवा कर लिये ज॒रूर कोई राज है.
डेरे पहुंच कर सेवादार के पूछने पर बाबाजी ने कहा
“आम को अच्छी तरह धोकर लाओ और साथ में चाकू भी लाओ”
सेवादार ने वैसा ही किया.
जब आम को काटा गया तो उसमें से एक कीड़ा निकला.
कीड़े को हाथ में रखकर बाबाजी ने कहा
“इस जीव की मुक्ति का समय आना है इसलिये ये सब करना पड़ा अब इसका अगला जन्म मनुष्य का होगा”
जब कोई जीव संत के संपर्क में आता है तो उसका अगला जन्म मनुष्य का होता है.

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कोई कीड़ा किसी संत के पांव के नीचे मर जाये,
या टकरा कर मर जाये,
किसी फल आदि का सेवन जो संत करें. या जो भी जीव संत की सेवा में लगे उसका अगला जन्म मनुष्य का होता है.
कबीर साहिब की वाणी है
“गुरु सेवा ते भक्ति कमाई
तब ते मानस देही पाई
गुरु मिले तांके खुले कपाट
बहुरी न आवे जोनी वाट”
कि अगर कोई गुरु के संपर्क में आ जाये तो वह फिर योनी में यानि जन्म मरण में नहीं आता, उसका आवागमन समाप्त हो जाता है.
बाबाजी ने भी उस कीड़े का आवागमन समाप्त करवा दिया.

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