7.70K Views0 Comments

एक गांव में महान तलवरबाज़ रहा करता  था. पूरा साम्राज्य उसकी महानता के गुण गाता। तलवार के दम पर उसने आपने राजा के लिए कई लड़ाईया जीती। लेकिन समय पर किसका जोर चलता है लड़ाईया बढ़ती गई और तलवरबाज़ बुढा होने लगा.

उसने तय किया की वो अपनी कला को व्यर्थ नही होने देगा और आने वाली पीढ़ी को तलवार से लड़ना सिखाएगा। कुछ ही समय में उसके पास बहुत सारे शिष्य आ गए जो तलवारबाज़ी सीखना चाहते थे। उसने अपनी पूरी मेहनत से अपनी तलवारबाज़ी के गुण अपने शिष्यो को सिखाना शुरू कर दिया

उनके शिष्यो में एक ऐसा शिष्य था जो साधरण नही था उसने बहुत जल्द ही अपने गुरु से शिक्षा प्राप्त कर ली। और धीरे धीरे अपनी गुरु की तरह ही एक महान तलवरबाज़ बन गया।

Read this?   सडक के किनारे बनी झोपडी में वह बूढी माँ अपने बच्चे के साथ... एक प्रेणादायक कहानी

लेकिन अब क्या?  लोग उसे अभी भी उसके गुरु के नाम से ही जानते थे जबकि उसको लगता था की वो अपने गुरु से भी अच्छा तलवरबाज़ है इस बात का उसे घमण्ड होने लगा और जो नही होना चाहिए था.

वही हुआ शिष्य ने गुरु को चुनोती दे डाली और गुरु जी जो की अब बूढ़े हो चुके था, ने चुनोती स्वीकार कर ली। और मुकाबला एक सप्ताह बाद का रखा गया। शिष्य को लगा गुरु ने उसकी चुनोती स्वीकार कर ली तो पक्का उसने तलवारबाज़ी की सारी विधियाँ मुझे नही सिखाई. अब शिष्य परेशान रहने लगा और सोचने लगा ऐसी कौन से विधि है जो उसके गुरु ने उसे नही सिखाई.

Read this?   उसने महात्माजी को प्रणाम किया आशीर्वाद लिया और चल पड़ा अपनी राह पर

अब शिष्य आपने गुरु की ताकाझकि करने लगा ताकि गुरु अपनी उस विधि का अभ्यास करे और शिष्य उस विधि को देख ले । एक दिन गुरु एक लोहार के पास गया और उसने लोहार को 15 फुट लंबी म्यान बनाने को कहा ये बात शिष्य ने सुन ली उसे लगा उसका गुरु 15 फुट दूर से ही उसका सर धड़ से अलग कर देगा वो भाग कर दूसरे लोहार के पास गया और 16 फुट लंबी तलवार बनवा लाया।

Read this?   जब भगवान ने किसान को एक मौका दिया - एक दिलचस्प कहानी

मुकाबले का दिन आ गया. दोनों तलवरबाज़ अपनी अपनी तलवारे लेकर मैदान में खड़े थे। जैसे ही मुकाबला शुरू हुआ गुरु ने शिष्य के गर्दन पर तलवार रख दी और शिष्य मयान से तलवार निकलता रह गया। असल में गुरु की तलवार की केवल म्यान ही 15 फुट का था उनकी तलवार एक साधारण तलवार थी।

मोरल—-जीवन में सारे युद्ध तलवार पर नही, अनुभव और आत्मज्ञान से भी जीते जाते है

”जिन्दगी की पाठशाला में अनुभव और आत्मज्ञान एक ऐसा सक्त शिक्षक है जो परीक्षा पहले लेता है और सिखाता बाद में है”