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1979 में श्री हुज़ूर महाराज जी के इँग्लैंड दौरे के दौरान, हुजूर ने मिसेज वुड के घर पे सेवादारों की एक मीटिंग बुलाई, मिसेज वुड, इँग्लैंड में हुजूर महाराज जी की प्रतिनिधि है। उस मीटिंग में मिसेज वुड ने श्री कुन्दन सोंधी जी के एक सत्सँग की कुछ बेहतरीन बातें सुनाईं, जो कि कैनेडा म़े, श्री हुज़ूर महाराज के प्रतिनिधि हैं।*

*सत्सँग हमारे मन को पवित्र करने का सबसे सरल साधन है।सत्सँग की निरन्तरता से हमारे सारे कर्मों में ही शुद्धता आने लगती है, हम समय की पाबंदी का भी ध्यान रखते हैं।*

*इसे भजन सिमरन से बिल्कुल अलग ले कर चलना चाहिए। यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि आज मैंने सिमरन को पूरा समय दिया है, तो फिर मैं सत्सँग में क्यों जाऊँ?*

*सत्सँग में नियम से जाना, हमारी गुरू भक्ति को गहरा करता है।*

*भजन सिमरन ही सतगुरू के प्रेम को अपने अन्दर पैदा करने का एक ज़रिया है।*
*इसलिए सत्सँग पहले नम्बर पे आता है, जहाँ लगातार जाने से हमारे दिल म़े प्रेम पैदा होता है, धीरे धीरे बढ़ता है।*

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*पहले सत्सँग को प्यार से सुनो, अच्छी बातों को चुनो, जीवन में लागू करो, तभी सतगुरू की दया मेहर को महसूस कर पाओगे।*

*यही हमारे सतगुरू का हुक्म है, जो हमें प्रेम के पथ पर आगे ले कर चलता है।यही भक्ति भावना, हमें रूहानियत में भरपूर मदद करती है।*

*अगर आप बीमार हैं और इस वजह से सत्सँग सुनने नहीं जा पाये, तब कोई बात नही। सतगुरू हमारी अन्तर की हालत बहुत अच्छी तरह से, जानते हैं, हम कोई भी बहाना बना कर सतगुरू को धोखा नहीं दे सकते।*
*हमारे अन्दर क्या चल रहा है, हमारा चालाक मन हमें धोखा दे रहा है।*

*हमें अपने विवेक से काम लेना है, कि सत्सँग जायें या ना जायें*
*क्या हम उस समय सत्सँग से कोई ज़्यादा ज़रूरी काम कर रहे हैं?*

*बहुत महत्वपूर्ण*
*जिन रूहों ने बेशक अन्तर मे, काफी अच्छी तरक्की भी कर ली है, लेकिन वो सभी नियम से सत्सँग सुनने जाते हैं*
*सन्तजन समझाते हैं कि काल बहुत शक्तिशाली है, और हमारा मन उसी का नौकर है।*

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*मन ने बहुत सी पहुँची हुई रूहों को भी अन्दर धोखा दे दिया।*

*बेशक मन का ज़ोर त्रिकुटी या ब्रह्म के ऊपरी छोर तक ही चलता है।*

*आश्चर्य*
*कई बार पारब्रह्म, या भँवरगुफा में भी जा चुकी आत्माएं, नीचे गिर जाती है।*
*श्री हुज़ूर स्वामी जी महाराज फरमाते हैं, लेकिन उन रूहों की जल्दी ही सँभाल हो जाती है।*

*केवल सतलोक में जा चुकी रूहें ही काल और माया के जाल से बच जाती हैं, वहाँ पर इन दोनों की दाल नहीं गलती।*
*जो भी सत्सँगी नियम से सत्सँग अटेंड नहीं करते, उन का अक्सर अपने गुरू से भरोसा ही डाँवाडोल हो जाता है।*
*उनका सन्तों की शिक्षा से ही भरोसा उठ जाता है, वो केवल नाम के ही साथ है।*
*जो भी नियमित सत्सँग सुनेंगे, उन्हें भजन सिमरन में भी फायदा मिलेगा*

*सत्सँग कर्ता अच्छा है या बेकार, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए, हमें केवल सन्त की बाणी पर ध्यान देना है, वो तो पूर्ण हैं, उनकी शिक्षा भी पूर्ण है, आप किसी का इम्तिहान लेने नहीं आये थे? आप तो अपने सतगुरू के बुलावे पर आये थे, हैं ना?*

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*मैं कुछ ऐसे प्रेमी सत्सँगियों को भी जानता हूँ जो सैंकड़ों मील यात्रा करके केवल एक घण्टे का सत्सँग सुनने आते हैं*
*यह उनका अपने सतगुरू के प्रति प्यार है, जो दूरी को नज़दीकी में बदल देता है*
*यदि आप कोई ज़रूरी काम छोड़कर भी सत्सँग सुनने आते हैं, तो भी आपका कोई नुक्सान नहीं होगा*

*सत्सँग में जाये बिना, अपनी कमियों और कमज़ोरियों को पहचानना और दूर करना असँभव है।*

*सत्सँग में सुना हुआ केवल एक वाक्य, एक लाईन आपकी ज़िन्दगी बदल सकता है।*

*ये बदलाव, और कहीं पे सँभव नहीं है।केवल एक लफ्ज़ भी ऐसा कर सकता है एक छोटी सी कोशिश, आपको भक्ति और प्रेम का ख़ज़ाना बख्श सकती है। कभी भी, कहीं भी एक भी सत्सँग ना छूट जाये।*

*🙏🏼राधा स्वामी जी 🙏🏼*

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