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एक जंगल में एक चिड़िया पेड़ पे बैठ के कुछ सोच रही थी। चिड़िया को ऐसे उदास देख के एक कबूतर उसके पास आता है और उसे उदासी का कारण पूछता है। चिड़िया ने कहा, “में एक बहुत ही छोटा पक्षी हु, इस लिए मुझे सभी से डर-डर के जीना पड़ता है। में किसी का मुकाबला नहीं कर सकती हु इस लिए में ख़ुद को बहोत ही कमनसीब समजती हु”।
कबूतर ने उसे मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, “ऐसी नकारात्मक सोच को छोड़ दो। तुजे पता है ना, में कितनी महेनत कर के मेरे बच्चों के लिए घोंसला बनाता हु, लेकिन कई निर्दय लोग मेरा घोंसला तोड़ देते है। मेरी सारी महेनत पानी में मिल जाती है फ़िर भी में हिंमत नहीं हारता।
अरे! कोयल की ही बात करता हु, वो कितना मधुर गाती है, लेकिन रंग सावला है फ़िर भी वो अपने जीवन से ख़ुश है। हंस और बत्तख पानी में तैर सकते है लेकिन उचे आसमां में उड़ नहीं सकते। मोर भी उचे आसमां में उड़ नहीं सकते और कई कमनसीब तोते को अपना संपूर्ण जीवन पिजरे ही बीताना पड़ता है।
कहने का अर्थ ये है की, दुनिया में सभी को कुछ ना कुछ दुःख है, खामिया है इस लिए हमे निराश नहीं होना चाहिए। ईश्वर ने हमे जो सवरूप में जन्म दिया है वो योग्य ही है”।
कबूतर की महत्वपूर्ण बात सुन के चिड़िया को सारी बात समज में आ गई। उसने कबूतर से कहा, ” तुम्हारी बात सही है, संपूर्ण सुख और शांति दुनिया में किसी के पास नहीं है। अब में भी ऐसी नकारात्मक सोच नहीं रखूगी और हमेशां ख़ुश रहने की प्रयत्न करुँगी। तुम्हारा ख़ूब ख़ूब धन्यवाद्”।

हम मनुष्य को इस कहानी से सिखना चाहिए की, हम जैसे भी हो, जैसी भी कठिन परिस्थितियों में हो हमें हमेंशा ख़ुश रहने का प्रयत्न करना चाहिए।
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Category:

Inspirational Story

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