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मेरा एक दोस्त
अपनी वाइफ़ और पांच साल के बच्चे
को लेकर पहली बार ब्यास गया था
उसकी वाइफ़ ने पहले कभी सतगुरु
को नहीं देखा था। वो मेरी वाइफ़ और
बच्चो के साथ थी जेसे ही सतगुरु ने
सत्संग शुरू किया और सामने आये
उसे पता नहीं क्या हुआ उसकी
आँखों से आंसू रुक ही नहीं रहे थे
बहुत देर तक ऐसे ही चलता रहा फिर
उससे पूछा तो उसका कहना था ये
मेरे नियन्त्रण से बाहर था अपने आप
मेरे आंसू बह रहे थे।”ये हमारी आत्मा
की कुदरती तोर पर मालिक की तरफ
खेंच होती है।जब वो मालिक को सतगुरु
रूप में देखती है तो अनायास ही आंसू
प्यार में बहने लगते है।देखो उसने तो
पहले कभी देखा नहीं था बस घर में
फोटो देखा था।कुछ ये पहले जन्मों
का भी फर्क पड़ता है जब आप अपने
सामने उस परमात्मा को देखते हैं तो
ऐसा होना स्वाभाविक है कितने ही जन्मो
से ये प्यासी आत्मा जब अपने प्रियतम
को सामने देखती है तो आंसू निकल
ही जाते है।
मानलो आप अपने पिता के

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साथ मेले में घुमने गई और ऊँगली
छुट कर गुम हो गई ।फिर बहुत समय
आपको लोग समझाते है लो बेटा ये
toy लो और इससे खेलो पापा आते
ही होंगे। और आप का मन टॉफी toy
झूले झूलने में लग जाता है लेकिन
अंदर एक पिता से मिलने की टीस
छुपी रहती है। आप किसीसे नहीं कहती
फिर अचानक मेले में आपके पिता
सामने आ जाते है क्या आप आंसुओ
को रोक पाओगी क्या ? जब आपका
पिता कहेगा चल बेटा चल में तुझे
लेने आया हूँ। ये मेला है इसमें नहीं
रहना हम घर चलेंगे बेटा। तो क्या
आप अपने आंसुओ को रोक पाओगी ?
नहीं कभी नहीं न ..इसीतरह जब प्यासी
रूहे अपने पिता को सामने पाती हैं
तो सतगुरु के दर्शन करके अपने आंसू
नहीं रोक पाती है।
गुरु प्यारी साध संगत जी हाथ जोड़ कर प्यार भरी राधा सवामी जी…

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