3.18K Views0 Comments

लालबहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री होने के बावजूद अत्यंत सरल, सादगी संपन्न और दूसरों का सम्मान करने वाले व्यक्ति थे | वे अधिकतर महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करते वक्त अपने सहयोगियों अथवा अपने नौकर या माली से पूछ बैठते क्यों भाई! तुम्हारी इस मुद्दे पर क्या राय है’

लोगों को शास्त्रीजीकी का यह व्यवहार बड़ा ही अजीब लगता था | एक दिन उनके मित्र ने उनसे पूछ ही लिया -शास्त्रीजी!’ आपका यह व्यवहार आज तक हमारी समझ में नहीं आया | कहाँ राजनीती की पेचीदा बातें और कहाँ नौकर या माली की राय ? भला इन लोगों को इन गंभीर बातों की क्या अक्ल ?

Read this?   Malik ki Mauj Short Story By Babaji

शास्त्रीजी मुस्कराकर बोले- ” मुझे लगता हैं की आपको यह कहानी सुनकर मेरी बात ज्यादा अच्छे से समझ आएगी | आपके प्रश्न का सही जवाब इसी से मिल जायेगा | शास्त्रीजी ने आगे कहा गुरुत्वाकर्षण के सिध्दांत की खोज करने वाले न्यूटन के घर उनकी बिल्ली ने बच्चे दिए | रात को जब घर के सभी दरवाजे बंद हो जाते तो वह बिल्ली और उसके बच्चे बाहर निकलने के लिए उत्पात मचाते |

तब न्यूटन ने बिल्ली और उसके बच्चों के लिए दरवाजे में दो छेद एक छोटा और एक बड़ा छेद बनाने के लिए अपने नौकर से कहा | तब नौकर ने सुझाया की एक बड़ा छेद ही काफी हैं क्योंकि जिस छेद से बिल्ली गुजरेगी उसी छेद से बिल्ली के बच्चे और भी आसानी से निकल जायेंगे |

Read this?   चीजें हमेशा वैसी नहीं होतीं, जैसी दिखती... एक रोचक कहानी

यह सुनकर न्यूटन हैरान रह गए की इतनी मामूली सी बात उन्हें क्यों नई सूझी ?’ घटना सुनाकर शाश्त्रीजी ने कहा कभी कभी छोटे व्यक्ति की सलाह भी बड़े काम की साबित हो जाती है | मित्र उनकी बात सुनकर निरुत्तर हो गया | कही बार ज्ञान व बुद्धि में अल्प व्यक्ति भी अपने अनुभव के कारण महत्वपूर्ण विचार प्रकट करते हैं, जो बड़े निर्णय लेने में सहायक सिध्द होते हैं |

Read this?   Satguru Ka Intjar - Radha Soami Sakhiya

इस लिए हमें किसी को तुच्छ नहीं समझना चाहिए, सभी लोगों का मसीहा कोई एक होता हो लेकिन, हर एक अपनी-अपनी जिंदगी के हीरो तो होते ही हैं | कहने का मतलब सभी अपने आप में श्रेष्ठ हैं | न तुम मेरे जैसे हो न में तुम्हारे जैसा हूँ | अंत: दोस्तों, हमें सभी का महत्व समझते हुए उनसे राय लेना चाहिए |