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एक साहूकार घोड़े पर सवार होकर जंगल से गुज़र रहा था। तभी घोड़े को प्यास लगी।साहूकार ने आस पास देखा वहां एक रहट(गाँव में पानी खिंच कर सप्लाई करने का साधन)चल रही थी।
साहूकार जैसे ही घोड़े को रहट के पास लाकर पानी पिलाने लगता घोडा रहट से चमककर(डरकर)दूर चला जाता। साहूकार ने रहट वाले को बोलता भइया इस रहट को रोको मेरा घोडा इससे डर कर पानी नही पीता। उसने रहट रोक दी ,रहट रुकते ही पानी आना भी बंद हो गया क्योकि रहट के चलने से ही पानी आता था।

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साहूकार परेशान हो गया फिर उस आदमी ने समझाया कि यदि घोड़े को पानी पिलाना है तो रहट चलते में ही पानी पिलाना होगा इसी प्रकार हम सोचें कि जब भी अच्छा समय आयेगा।
जेसे कोई दुःख तकलीफ नहीं होगी,बच्चो की चिन्ता खत्म हो जायेगी,मौसम थोड़ा ठीक हो जायेगा,घर का मकान होगा बेटे ,बेटी की शादी कर ले,बच्चा बड़ा होकर दूकान या कारोबार सम्भाल ले,फिर आराम से गुरुजी का बताया भजन- सिमरन कर लेंगे।तो ये कभी न हो पायेगा हर आने वाला नया दिन न चाहते हुवे भी कोई नई समस्या लेकरआयेगा सतगुरु जी के बताये भजन सुमिरन को समय तो हमे इन समस्याओ में रहते हुवे ही देना पड़ेगा।
क्योकि जीवन है तो समस्या है ,समस्या भी जीवित तो है मरने के बाद तो कोई समस्या ही नहीं। इसलिये प्यारे जीते जी इन्ही परिस्थितियों में रहते हुवे उस प्रीतम से प्यार कर ले,और रोज़ रोज़ भजन ये वेला रोज रोज हथ आने वाला नही है सुमिरन को ज्यादा से ज्यादा समय दिया जाये तब सतगुरु जी की खुशी हासिल करेंग

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Radha Soami Ji!

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