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Sewa Sant! A Nice Radha Soami Sakhi 2016

हरनाम सिंह जी की कपड़े की दुकान थी। परन्तु
सन्तों की सेवा में इतना समय लग जाता कि दुकान
दिन में कभी दो-चार घण्टे ही खुलती और कभी
बिल्कुल बंद रहती। यह कथन बिल्कुल सत्य है कि जो
सदगुरु का जिक्र करते है, सदगुरु स्वयं उनकी फिक्र करते है।
ऐसा ही संत हरनाम सिंह जी के साथ होता रहा।आप
चाहे दुकान थोड़े समय के लिए खोलते रहे, परन्तु उसी
समय में दिन भर की कमाई हो जाती। एक दिन तो
आपकी दुकान के आस पड़ोस वाले दुकानदार इखट्ठे
होकर आपके पास आए और कहने लगे, “हरनाम जी, एक
बात हमें बताईये कि क्या आप ग्राहकों को टाईम देकर
आते हो। आप जिस समय दुकान खोलते हो, ग्राहकों
का तांता लग जाता है। हम सुबह से धूप-बत्ती जलाकर
ग्राहकों की इंतज़ार में बैठते है। निगाहें सड़क की ओर
रहती है कि कौन सा ग्राहक दुकान के अंदर आएगा।
परंतु आप तो दुकान का ताला खोलते ही हो कि
ग्राहकों का तांता लग जाता है और आप दो घण्टे में
ही दिन-भर की कमाई करके सुरखरु हो जाते हो।”भाई
साहब हरनाम सिंह जी ने नम्रता से जवाब दिया कि,
“भाई साहब जी, न मैं ग्राहकों को बता कर आता हूँ,
न ही मेरे ग्राहक पक्के है। बात केवल इतनी है कि जिस
मालिक (सदगुरु) की मैं नौकरी करता हूँ, वह मेरा बहुत
ध्यान रखता है। मेरा मालिक इन ग्राहकों को स्वयं
ही उसी समय भेजता है जब मैं दुकान पर होता हूँ और मुझे
अपनी सेवा के लिए समय दे देता है।
“राधा स्वामी जी”

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