Tag: babaji story

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मैं खुद को शर्मिंदा हूं और आपसे माफी मांगना चाहता हूं – एक प्रेरणादायक कहानी

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Bahut samay pahale kee baat hai , kisee gaanv mein ek kisaan rahata tha . vah roz bhor mein uthakar door jharanon se svachchh paanee lene jaaya karata tha . is kaam ke lie vah apane saath do bade ghade le jaata th...

हजूर महाराज जी ने एक पत्र का जवाब दिया

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Huzur Maharaj ji in responsed to a letter. Dear sister Do not diminish your heart. Never think that you are alone in a moment or you are being ignored or no one is watching you. You are receiving every help fr...

बाबा सरदार बहादुर सिंह जी के समय की बात

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Ye us time ki BAAT hai jab; Baba Sardar Bahadur Singh Ji gaddhi par baithe hue the. Hazoor Maharaj Sawan Singh Ji ka koi premi-sewak unke paas aaya or sir niche kar k rote hue bola; Mein Dera Beas chhodkar jaana ...

स्टोरी एक ब्लाइंड आदमी की जो डेरे में आया करता था…

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Once a blind person, who was a devotee of Atmakta, came to the tent. He said to a servant of the hero, “Veer ji, I want to talk to your chef, you can tell how I can meet him, that savadar Veer said that the total...

बाबा जी ने सत्संग डेरा ब्यास में पूरे 54 मिनट किया

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आज का बाबा जी का सत्संग आज डेरा ब्यास में पूरे 54 मिनट सत्संग किया और बाबा जी ने अकेले सत्संग किया मतलब कि आज बाबाजी के साथ पार्टी साहब नहीं थे बाबा जी के सत्संग की शुरुआत कर्मों से की बाबाजी ने बताया कि प्रमाद की न्य...

Habits tell the whereabouts of aught – Story Hindi

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*आदतें औकात का पता बता देती हैं...* एक राजा के दरबार मे एक अजनबी इंसान नौकरी मांगने के लिए आया। उससे उसकी क़ाबलियत पूछी गई, तो वो बोला, "मैं आदमी हो चाहे जानवर, शक्ल देख कर उसके बारे में बता सकता हूँ। राजा ने...

बाप ने बेटी को गले से लगा लिया – एक दिलचस्प कहानी जरूर पढ़े…

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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ एक घर में एक बेटी ने जनम लिया, जन्म होते ही माँ का स्वर्गवास हो गया। बाप ने बेटी को गले से लगा लिया। रिश्तेदारों ने लड़की के जन्म से ही ताने मारने शुरू कर दिए कि पैदा होते ही माँ को खा गयी मनहूस...

वह दरवाजा खोलती है और भोंचक्की रह जाती है – एक प्रेणादायक कहानी

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हमेशा अच्छा करो ??एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोज़ाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वहाँ से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए पकाती थी..। वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती थी, जिसे कोई भी ले सकता था...