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बाबाजी ने हाथ में पांच सौ का नोट लहराते हुए अपनी सत्संग शुरू की – एक प्रेणादायक कहानी

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  बाबाजी ने हाथ में पांच सौ का नोट लहराते हुए अपनी सत्संग शुरू की. हाल में बैठे सैकड़ों लोगों से उसने पूछा ,” ये पांच सौ का नोट कौन लेना चाहता है?” हाथ उठना शुरू हो गए. फिर बाबाजी ने कहा ,” मैं इस नोट को आपमें ...

सडक के किनारे बनी झोपडी में वह बूढी माँ अपने बच्चे के साथ… एक प्रेणादायक कहानी

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जनवरी की सर्द भरी रात थी सडक पर चारो तरफ सन्नाटा फैला हुआ था दूर दूर तक कोई नजर नही आ रहा था बीच बीच में सिर्फ कुत्तो के भौकने की आवाज़ आती थी जो की सडक की सन्नाटे को बीच बीच में चिर रही थी लेकिन सडक के किनारे बनी झोपड...

एक सेवादार भाई जो व्यास मे सेवा करते है मुलाकात हुई – एक प्रेणादायक कहानी

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.. साखी .... एक सेवादार भाई जो व्यास मे सेवा करते है मुलाकात हुई गुरू घर की काफी बाते हुई उन्होंने हुजूर महाराज जी के समय की एक बात बतायी । हुजूर महाराज जी आई कैम्प का सेवादारो को प्रसाद दे रहे थे।ऊधर जहाँ मंगलसैन क...

बेटे ने कहा, “नहीं सर, मैंने कुछ भी नहीं छोड़ा है” – एक रोचक कहानी

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A son took his old father to a restaurant for an evening dinner.  Father being very old and weak, while eating, dropped food on his shirt and trousers.  Other diners watched him in disgust while his son was calm. A...

बाबाजी मुस्कुराये , बोले.. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया

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यह मैसेज जितनी बार पढे उतना कम ही है । एक बार बाबाजी आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे  आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ... उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें  ...

मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ – एक प्रेणादायक कहानी

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?बहुत समय पहले की बात है , किसी गाँव में एक किसान रहता था . वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था . इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था , जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे प...

द्वार खुला होने के कारण उनकी आवाजें बाहर कमरे में बैठी माँ को भी सुनाई दे रहीं थीं…

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बेटा-बहु अपने बैडरूम में बातें कर रहे थे। द्वार खुला होने के कारण उनकी आवाजें बाहर कमरे में बैठी माँ को भी सुनाई दे रहीं थीं। बेटा---" अपने job के कारण हम माँ का ध्यान नहीं रख पाएँगे, उनकी देखभाल कौन करेगा ? क...

बाबा जी ने पीछे देखा और सत्संगी से पूछा – एक प्रेणादायक कहानी

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एक हिन्दू सन्यासी अपने शिष्यों के साथ गंगा नदी के तट पर नहाने पहुंचा. वहां एक ही परिवार के कुछ लोग अचानक आपस में बात करते-करते एक दूसरे पर क्रोधित हो उठे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे . संयासी यह देख तुरंत पलटा और अपन...