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एक गाँव में एक परवेश नाम का आदमी रहता था| परवेश अपने बीवी और एक बेटी के साथ एक छोटे से झोपड़े में रहता था| परवेश अपनी गरीबी से बहुत परेशान था| वह अपनी बेटी को अच्छे स्कूल में पढ़ाकर और एक अच्छे घर में शादी करवाना चाहता था| उसके बहुत से सपने थे| परन्तु गरीबी की वजह से वह बहुत मजबूर था| मगर इतनी परेशानी के बावजूद भी वह कभी भगवान् के मंदिर जाना नही भूलता था|

उसकी छोटी सी बेटी भी अपने पिता के साथ रोज़ मंदिर जाया करती थी| उसी मंदिर के सामने एक अम्मा इडली बेचा करती थी| परवेश की बेटी को इडली बहुत पसंद थी| परवेश दिन भर मजदूरी करता था और रोज़ शाम को काम से लौटने के बाद वह इडली वाली अम्मा से इडली लिया करता था और सबसे पहले भगवान् को चढ़ाया करता था| और फिर थोडा मंदिर के पास बैठे भूखे लोगों को देने के बाद जो बचता उसे अपने घर ले जाया करता था| फिर एक दिन अचानक उसे मालिक द्वारा काम से निकाल दिया गया|

काम छूटने के बाद परवेश कई दिनों तक परेशान रहा| पैसे ना होने के कारण वह उधार पर ही अम्मा से इडली लेकर भगवान् को चढ़ाने और भूखों को देने के बाद अपनी बेटी के लिए ले जाने लगा| उसने नए काम की बहुत तलाश की परन्तु उसे कहीं भी नौकरी नही मिली| एक दिन वह बहुत परेशान हो गया और अपनी गरीबी की हालत पर रोते-रोते उसी मंदिर में भगवान के पास गया| और प्रार्थना करने लगा कि “भगवान् तुम मेरे कष्टों को कब हारोगे| कब तक गरीबी की ज़िन्दगी बसर करनी पड़ेगी”

ऐसा कहकर वह दुखी मन से मंदिर की सीढ़ी पर ही सो गया| जब वह सुबह उठा तो उसे मंदिर की सीढ़ी पर एक माचिस की डिब्बी मिली| उसने वह डिब्बी उठाया और उसे खोल कर देखा तो उसमे कुछ पैसे पड़े हुए थे| वह थोडा हैरान सा हो गया और सोचने लगा कि ऐसे डिब्बी में किसके पैसे गिर गये| उसने मंदिर के पुजारी से भी पूछा कि कोई अपने पैसे यहाँ भूल गया है| पर पुजारी को भी इसके बारे में कुछ नही पता था| फिर उसने सामने बैठी इडली वाली अम्मा को भी पुछा तो उन्हें भी इसके बारे में कुछ नही पता था| अम्मा ने उसे समझाया कि “तू इसे भगवान् की देन समझ कर रख ले| क्या पता भगवान ने ही तेरे लिए कुछ सोचा हो|” फिर वह पैसे पाकर बहुत खुश हुआ और वापस मंदिर में भगवान् जी के पास गया और उसने भगवान् का धन्यवाद किया और कहा कि भगवान् आज से आप मेरे साझेदार हुए| मैं आपसे वादा करता हूँ कि मैं अपनी पहली कमाई का पहला हिस्सा आपकी दान पेटी में डाला करूंगा और इन्ही पैसों से में अपना कुछ काम शुरू करूंगा|

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उसने उन पैसों से ठेला किराये पर लिया और सप्लाई का काम शुरू कर दिया| और कठिन मेहनत और ईमानदारी से काम करते हुए वह एक दिन बहुत बड़ा आदमी बन गया| देखते ही देखते उसने एक ट्रक भी ले लिया जिससे दुसरे तरह के बड़े-बड़े माल भी सप्लाई करने लगा| उसके पास अब अपना घर, गाडी और बहुत पैसा भी आ गया था| और उसने अपनी बेटी को भी अच्छी शिक्षा दिलवाई| ऐसा करते-करते वह अपनी कमाई का पहला हिस्सा मंदिर में दान करता रहा|

अब उसके पास इतना काम आने लगा कि अब परवेश मंदिर में जाने तक का टाइम नहीं निकाल पा रहा था| अब वह भूखे लोगों को भी खाना नही खिलाया करता था| बाहर से ही अपने ड्राईवर को अपनी कमाई का हिस्सा मंदिर की दान पेटी में डालने के लिए भेज देता था|

एक दिन उसी मंदिर में उसकी बेटी उसे मिली और उसने अपनी बेटी से पूछा कि “तुम यहाँ किसलिए आई हो?”

उसने कहा “मैं मंदिर के दर्शन करने और इडली वाली अम्मा की इडली खाने आई हूँ|”

उसने अपनी बेटी से कहा “तुम ये रोड़ की चीज़े मत खाया करो| खाना है तो अच्छी दुकान से खाओ|”

उसकी बेटी ने अपने पिता की बात को अनसुना करके कहा “पिताजी आप भी मंदिर के दर्शन कर लो”

परवेश ने अपनी बेटी से कहा “बेटा अभी मेरे पास वक़्त नही है| अगर मैं काम नहीं करूँगा तो पैसे कैसे कमाऊंगा|” ऐसा कहकर परवेश वहाँ से चला गया|

उसी दिन वह काम से कहीं जा रहा था| तो उसके ड्राईवर ने देखा कि बीच सड़क में किसी औरत का एक्सीडेंट हो गया है| और उसे मदद की ज़रूरत है|

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उसके ड्राईवर ने गाडी रोककर बोला “साहब किसी औरत का एक्सीडेंट हो गया है क्या हम उसकी मदद करे?”

परवेश ने अपने ड्राईवर से कहा “तुम पागल हो क्या हम मदद करने लग गए तो काम कैसे करेंगे और कोर्ट कचहरी के चक्कर में कौन पडेगा? तुम गाडी साइड से ले चलो|”

और अगले दिन उसकी बेटी को लड़के वाले देखने आये परन्तु नापसंद करके वापस चले गये| दूसरी तरफ गलत माल सप्लाई की वजह से उसका काम और घर सील हो गया| सील की वजह से उसका घर से कहीं आना जाना भी बंद हो गया|

अगली सुबह उसकी बेटी कहीं जा रही थी| वह अपनी शादी टूटने की वजह से बहुत टेंशन में थी| इसी वजह से रास्ते में उसका एक्सीडेंट हो गया| एक्सीडेंट होते ही बेटी ने अपने पिता को तुरंत फ़ोन करके घटना बताया| इतना बताते ही वह बेहोश हो गयी| परवेश और उसकी पत्नी तुरंत दुर्घटना वाली जगह पहुंचे और वह अपनी बेटी के लिए सबसे मदद मांगता रहा पर उसे किसी की मदद नही मिली| जैसे-तैसे उसने और उसकी पत्नी ने अपनी बेटी को अस्पताल पहुँचाया|

डॉक्टर ने उन्हें बताया “बहुत खून बह चुका है| हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं, बाकी भगवान् की मर्ज़ी है|

डॉक्टर की यह बात सुनते ही उसे अपने भगवान् की याद आ गयी| और वह उसी मंदिर में गया| और भगवान् से कहने लगा कि मैंने आपकी भक्ति में क्या कमी रखी जो अपने मुझे इतनी बड़ी सजा दी है| हमेशा तो आपकी दान पेटी में हिस्सा डालता रहा हूँ| क्यूँ आज मेरी बेटी ज़िन्दगी और मौत के बीच झूल रही है” इसमें उसकी क्या गलती है?”

इतना सुनकर सामने वाली अम्मा आई और बोली “भगवान् को तुमने अपना साझेदार बना लिया तो भगवान तुम्हारे थोड़ी हो गए हैं| बल्कि भगवान् तो दुनिया को देते है| वही सबके कर्ता-धर्ता हैं| भगवान् को बस अपने भक्तों से ही प्यार होता है| दुसरो की भलाई से ही भगवान् खुश होते है| किसी की मदद से भगवान् खुश होते है| भूल गया तूने भगवान् के मंदिर में आना छोड़ दिया था और यहाँ तक कि भूखों को खाना खिलाना भी छोड़ दिया था| और तुमने कैसे एक औरत को बीच सड़क में मरता हुआ छोड़ दिया था| वह औरत भी मदद के लिए तड़प रही थी|तेरे ड्राईवर ने भी तुझे मदद करने के लिए कहा था पर तूने उसकी भी नही सुनी|”

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फिर ऐसा सुनते ही उसने पूछा “मगर ये सब बातें आपको कैसे पता?”

इडली वाली अम्मा ने कहा “वह औरत मैं ही थी, जिसका एक्सीडेंट हुआ था|” वह अम्मा से बातें कर ही रहा था की पंडित जी आये और परवेश ने पूछा “तुम किससे बातें कर रहे हो? यहाँ तो कोई भी नहीं है”

उसने पंडित से कहा “मैं इडली वाली अम्मा से बात कर रहा हूँ”

पंडित ने सवालिए अंदाज़ में कहा “इडली वाली अम्मा? उनकी तो कुछ दिन पहले ही रोड एक्सीडेंट में मौत हो गयी है”

परवेश ने मुड़कर देखा तो अम्मा वहां से गायब थी| और परवेश ने नीचे देखा तो अम्मा की जगह वही पैसे से भरी डब्बी पे पड़ी हुयी थी|

उसकी आँखें और दिमाग एकदम शून्य हो गया की आखिर वह किससे बात कर रहा था? क्या सच में भगवान उसके सामने अम्मा के रूप में आये थे या फिर उसका भ्रम था| उसे समझ नहीं आ रहा था की वह क्या करे|

परन्तु इस बड़ी घटना के बाद में बाद उसे अपनी बहुत बड़ी भूल का एहसास हो गया| और दूसरी तरफ उसकी पत्नी का फ़ोन आता है कि उनकी बेटी अब खतरे से बाहर है|

और इस घटना के बाद परवेश ने इडली वाली अम्मा की जगह पर इड्ली बेचना शुरू कर दिया|

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दोस्तों  इसलिए कहते है कि आप चाहे कितने भी अमीर बन जाओ और ज़िन्दगी में कितनी भी तरक्की कर लो पर इंसान को भगवान् और अपने पुराने समय को कभी नही भूलना चाहिए| जो इस समय को भूल जाता है वह ज़िन्दगी में कभी ना कभी ठोकर ज़रूर खाता है|

 

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