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एक सेठ ने अपने घर में साफ़ सफाई के लिए एक लड़के को नौकरी पर रख लिया लेकिन सेठ थोड़े शक्की किस्म का था और उसे लड़के की पर भरोसा नहीं था तो उसकी ईमानदारी परखने के लिए सेठ ने सेठ ने उसकी परीक्षा लेनी चाही तो फर्श पर एक रूपये का सिक्का डाल दिया तो लड़के ने जब सफाई करते समय उसे देखा तो जाकर सेठ को सौंप दिया |

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दूसरे दिन जब वो सफाई करने लगा तो उसने देखा कि फर्श पर पांच रूपये पड़े है इस पर उसे थोडा शक पैदा हुआ उसे लगा कि सेठ उसकी नियत को परख रहा है तो उसने जाकर पेसे सेठ को सौंप दिए और कुछ नहीं बोला  |

वो जब भी घर में काम करता था तो सेठ की निगाहे बराबर उसकी चोकसी करती | मुश्किल से एक हफ्ता बीता होगा कि उसे फर्श पर इस बार दस रूपये का नोट पड़ा मिला अब तो उसके तन बदन में आग लग गयी और सीधा सेठ के पास पहुँच गया और बोला लो संभालो अपना नोट और सम्भालों अपनी नौकरी |

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लड़का गुस्से में सेठ से बोला कि यह समझने के लिए कि अविश्वास से विश्वास नही पाया जा सकता इसे समझने के लिए पेसे के अलावा कुछ और चाहिए जो तुम्हारे पास नहीं है | मैं ऐसे घर में काम नहीं कर सकता हूँ | सेठ उसे देखता ही रह गया और इस से पहले की सेठ कुछ कहता लड़का जा चुका था |

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Moral of this Story : विश्वास पर दुनिया कायम है हमे बेवजह किसी पर इतना शक नहीं करना चाहिए क्योंकि शक ही विश्वास का सबसे बड़ा दुश्मन होता है |

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