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वैवाहिक जीवन में होने वाले लड़ाई-झगडे हर घर की कहानी है. जाहिर है की जब दो बर्तन आपस में खड़केंगे तो आवाज तो होगी. जिस प्रकार ताली एक हाथ से नहीं बजती उसी प्रकार वैवाहिक जीवन में होने वाले ज्यादातर लड़ाई झगडे के लिए स्त्री और पुरुष दोनों बराबर के भागीदार होते है. कई बार ये लड़ाई झगडे आपसी मनमुटाव को जन्म देते है, पति-पत्नी एक दूसरे की कमियाँ देखनी शुरू कर देते है, कोई भी अपनी गलतियों की जिम्मेदारी नहीं लेता  और समाधान के लिए अपने बुरे गुणो को नियंत्रित नहीं करता जिसका परिणाम तलाक तक भी पहुच जाता है. इस बात को इस कहानी के माध्यम से बताने का प्रयास किया गया है.

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एक बार एक व्यक्ति विवाह का निर्णय लेता है, शादी हो जाने के कुछ समय बाद ही दोनों में किसी ना किसी बात पर लड़ाई झगडे होना शुरू हो जाते है, रोज रोज के कलेश से तंग आकर दोनों एक दूसरे से अलग होने का निर्णय ले लेते है. तलाक हो जाने के कुछ समय बाद वह दूसरी शादी करने की योजना बनाता है.

पहली शादी की असफलता के बाद वह निश्चित करता है की दूसरी शादी के लिए सही लड़की का चुनाव वह बहुत ही योजनाबद्ध रूप से करेगा. पहले वह उन लड़कियों की लिस्ट बनाता है जिन्हें उसने शादी के योग्य समझा है. फिर वह उन लड़कियों के अच्छे गुणों को एक तरफ लिखता है और बुरे गुणों को दूसरी तरफ लिखता है. फिर वह उस लड़की को पसंद करता है जिसमे सबसे अधिक गुण है और सबसे कम बुरे गुण और उससे शादी कर लेता है.

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लेकिन दूसरी शादी पहली से भी ज्यादा असफल साबित होती है, इस दौरान वह एक भी बार अपने बुरे गुणों की लिस्ट बनाने के बारे में नहीं सोचता. उसके विवाह असफल साबित नहीं होते अगर वह समाधान के लिए अपने दिल में झांक के देखता और अपने बुरे गुणों पर नियंत्रण रखता.

इस कहानी के कहने का मतलब ये है की हम आपसी संबंधो को टूटने से बचाले यदि लड़ाई झगड़ो और तनावों के लिए एक दूसरे को भला बुरा बोलने से अच्छा अपने अन्दर झांक कर देखे क्या पता आपके बुरे गुण ही लड़ाई की वजह ना हो.