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**************** लघुकथा  ****************
नेक काम
कई बार आवाज लगाने के बाद भी श्रीमती जी ने चाय नहीं दी । देखा छः बज गए हैं । आँखे मलते हुए मैं उठ बैठा । अरे यह क्या ? घर लोगों से भरा था ! एक सफेद चद्दर उढ़ा , किसी को जमीन पर लिटाया गया था ।
मैं बोल तो रहा था पर किसी को मेरी आवाज शायद सुनाई नहीं दे रही थी । सब रो रहे थे । मुझे अब समझ आया । शाम को सोते वक्त खांसी के साथ मुझे सीने में दर्द हुआ था ।
हां मैं मर गया हूं । तभी यमराज ने आकर कहा, जल्दी करो । नही नही मैं कल ही सोच रहा था ,मैं भी नेक काम करना शुरू करूँगा । समाज सेवा करूंगा । गरीबों की मदद करूंगा
शुरू तो कर लेने दो !!!! कुछ दिन की मोहलत चाहिए । यमराज हाथ पकड़कर खींचने लगा । मैं छुड़ाने की भरपूर कोशिश कर रहा था । तभी किसी ने मेरी चद्दर खींच ली ।
सामने हमारी श्रीमती चाय का कप लिए खड़ी थी । आप क्या बड़बड़ा रहे हैं आज ? उठो । लो चाय पी लो । मेरे सपने का अंत हुआ
मैं आज से ही औरों के भले के नेक काम करना शुरू करूंगा । समाज सेवा करूँगा