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उन्होंने कहा, “मैंने भगवान के साथ दोपहर का भोजन किया था” एक रोचक कहानी

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There once was a little boy who wanted to meet God. He knew it was a long trip to where God lived, so he packed his suitcase with Twinkies and a six-pack of root beer and started his journey. When he had gone about th...

सडक के किनारे बनी झोपडी में वह बूढी माँ अपने बच्चे के साथ… एक प्रेणादायक कहानी

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जनवरी की सर्द भरी रात थी सडक पर चारो तरफ सन्नाटा फैला हुआ था दूर दूर तक कोई नजर नही आ रहा था बीच बीच में सिर्फ कुत्तो के भौकने की आवाज़ आती थी जो की सडक की सन्नाटे को बीच बीच में चिर रही थी लेकिन सडक के किनारे बनी झोपड...

चीजें हमेशा वैसी नहीं होतीं, जैसी दिखती… एक रोचक कहानी

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सन्तों की अपनी ही मौज होती है! एक संत अपने शिष्य के साथ किसी अजनबी नगर में पहुंचे। रात हो चुकी थी और वे दोनों सिर छुपाने के लिए किसी आसरे की तलाश में थे। उन्होंने एक घर का दरवाजा खटखटाया, वह एक धनिक का घर था और अंदर स...

बाबाजी मुस्कुराये , बोले.. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया

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यह मैसेज जितनी बार पढे उतना कम ही है । एक बार बाबाजी आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे  आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ... उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें  ...

वे अक्सर मेरी माँ और हम दोनों भाइयों को पीटा करते थे – एक दिलचस्प कहानी

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किसी शहर  में  दो  भाई  रहते  थे .  उनमे  से  एक  शहर  का  सबसे  बड़ा  बिजनेसमैन था तो दूसरा एक ड्रग -एडिक्ट  था  जो  अक्सर  नशे  की  हालत  में  लोगों  से  मार -पीट  किया  करता  था .  जब  लोग  इनके  बारे  में  जानते  ...

बाबाजी बोले – लो, तुम्हें इसी सन्दर्भ में एक कहानी सुनाता हूँ

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एक बार एक शिष्य ने विनम्रतापूर्वक अपने गुरु जी से पूछा-‘गुरु जी,कुछ लोग कहते हैं कि  जीवन एक संघर्ष है,कुछ अन्य कहते हैं कि जीवन एक खेल है और कुछ जीवन को एक उत्सव की संज्ञा देते हैं | इनमें कौन सही है?’गुरु जी ने तत्क...

बाबा भला ऐसा क्यों हुआ कि हमारे नाचने से बारिस नहीं हुई और आपके नाचने से हो गयी ? एक प्रेणादायक कहानी

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किसी गाँव मे एक बाबाजी रहा करता था ,वो जब भी नाचता तो बारिस होती थी . अतः गाव के लोगों को जब भी बारिस की जरूरत होती थी ,तो वे लोग साधु के पास जाते और उनसे अनुरोध करते की वे नाचे , और जब वो नाचने लगता तो बारिस ज़रूर हो...

बाबाजी ने हाथ में पांच सौ का नोट लहराते हुए अपनी सत्संग शुरू की – एक प्रेणादायक कहानी

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  बाबाजी ने हाथ में पांच सौ का नोट लहराते हुए अपनी सत्संग शुरू की. हाल में बैठे सैकड़ों लोगों से उसने पूछा ,” ये पांच सौ का नोट कौन लेना चाहता है?” हाथ उठना शुरू हो गए. फिर बाबाजी ने कहा ,” मैं इस नोट को आपमें ...